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यूपी में भाजपा का प्लान: पुराने नेताओं की दूर करेंगे नाराजगी, उपेक्षित चेहरों और युवाओं के लिए है भी ये योजना

Sat, 07 Nov 2026 09:08 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: Sharukh Khan Updated Sat, 07 Nov 2026 09:08 AM IST
सार

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने संगठन से मिले फीडबैक पर काम शुरू कर दिया है। भाजपा ने नब्ज टटोली है। युवाओं का भरोसा बनाए रखने पर काम शुरू कर दिया है। इसके साथ ही उपेक्षित चेहरों को सक्रिय करने की कोशिश की जा रही है। पुराने नेताओं की नाराजगी भी दूर की जाएगी।

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BJP UP Strategy: Plan to Address Old Leaders' Resentment, Bring Neglected Faces and Youth on Board
BJP UP Strategy - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने संगठन से मिले फीडबैक पर एक्शन शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े के दौरे में गोरखपुर क्षेत्र की 62 विधानसभा सीटों पर चुनावी तैयारियों के साथ संगठन की जमीनी हकीकत परखी गई। 
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पुराने और नए नेताओं से संवाद कर असंतोष के कारणों, उपेक्षित नेताओं की स्थिति और कार्यकर्ताओं की नाराजगी को समझने की कोशिश हुई। पुराने नेताओं को फिर सक्रिय करने, नए चेहरों के साथ समन्वय बनाने और परंपरागत मतदाताओं का भरोसा बनाए रखने की रणनीति पर मंथन हुआ।
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फीडबैक मिलने के बाद अब
जोर उन कमियों को दूर करने पर है जो चुनावी तैयारियों में बाधा बन सकती हैं। भाजपा के शीर्ष नेताओं के दौरे और अब हो रहीं कवायदों का जिक्र करते हुए वरिष्ठ पत्रकार मुमताज खान कहते हैं, भाजपा का लगातार स्थानीय स्तर पर मंथन करना क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।

 
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बैठकों के जरिये यह जानने की कोशिश की गई कि संगठन में कहां कमी है और किन नेताओं को साथ लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है। चुनावी तैयारियों के बीच पुराने और नए चेहरों के बीच समन्वय बनाना जरूरी है। इसके लिए केवल संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी सक्रिय करना होगा, जो किसी कारण से मुख्यधारा से दूर हो गए हैं।
 
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के राजनीति विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अमित कुमार उपाध्याय का मानना है कि सरकार में नौकरशाही का प्रभाव बढ़ने से कार्यकर्ताओं में उपेक्षा की भावना पैदा होती है। 
 

युवा वर्ग भी विभिन्न मुद्दों पर नाराज
इससे कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ने की आशंका रहती है। दूसरी ओर, युवा वर्ग भी विभिन्न मुद्दों पर अपनी नाराजगी जता रहा है। ऐसे में राजनीतिक नेतृत्व के लिए युवाओं की बात सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना जरूरी है।

 

संघ प्रमुख मोहन भागवत भी युवाओं के विचारों और उनकी अपेक्षाओं को सुनने पर जोर दे चुके हैं। ऐसे में सरकार और संगठन के स्तर पर वही प्रयास किए जा रहे हैं जो किसी भी राजनीतिक दल के लिए जरूरी होता है लेकिन क्रियान्वयन में अब तेजी नजर आ रही है।

भाजपा के सामने बड़ी चुनौती
वरिष्ठ पत्रकार शैलेंद्र श्रीवास्तव का मानना है कि भाजपा के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती अपने परंपरागत समर्थक वर्गों में भरोसा बनाए रखने की है। यूजीसी के नए नियमों को लेकर नाराजगी सामने आई है।

केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में नियमों की समीक्षा के लिए समिति गठित करने पर विचार का आश्वासन इसी दबाव का परिणाम है। पुराने और लंबे समय से उपेक्षित नेताओं की बात सुनना सकारात्मक पहल है।

 

उन्हें फिर से सक्रिय कर जिम्मेदारी देने से संगठन को मजबूती मिल सकती है। अलग-अलग वर्ग की अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर हाल में कई कदम उठाए गए हैं। इस फीडबैक के बाद भाजपा सरकार व संगठन के स्तर पर कई और कदम उठाए जाते दिखेंगे।
 

सभी 62 सीटों पर जीत का लक्ष्य
भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय ने कहा कि पार्टी का लक्ष्य गोरखपुर क्षेत्र की सभी 62 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करना है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं को अभी से चुनावी तैयारियों में जुटने का संदेश दिया है। इसी क्रम में जिलों में संगठनात्मक गतिविधियां तेज की जा रही हैं। पार्टी का जोर संगठन को सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं को चुनावी जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने पर है।
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