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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   A fire turned the factory into a gas chamber, causing workers to suffocate; the facility did not even have an NOC from the fire department.

Delhi NCR News: आग लगने से गैस चैंबर बनी फैक्टरी तो मजदूरों का घुटा दम, अग्निशमन विभाग की एनओसी भी नहीं संवाद न्यूज एजेंसी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 31 Oct 2026 09:49 PM IST
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मंगोलपुरी फैक्टरी आग हादसा--
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- फैक्टरी में आग के हादसों से नहीं लिया जा रहा सबक, सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी पड़ रही भारी

संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
दिल्ली के मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र स्थित बी-294 की जूता फैक्टरी में आग लगने से चार मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई। बेसमेंट में लगी आग के बाद पूरी इमारत धुएं से भर गई और देखते ही देखते गैस चैंबर में तब्दील हो गई। इमारत से बाहर निकलने के लिए एक ही रास्ता था। आग लगने के दौरान मुख्य गेट बंद होने के कारण मजदूर बाहर नहीं निकल सके। बेसमेंट में धुआं बाहर निकालने के लिए कोई खिड़की नहीं थी। वहीं, ऊपरी मंजिलों पर बालकनी भी नहीं बनी थी। ऐसे में जान बचाने के लिए ऊपर की ओर भागे मजदूरों के पास बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था। दम घुटने से चारों मजदूरों की जान चली गई।
फैक्टरी में सुरक्षा इंतजामों की कमी और आपात स्थिति में बाहर निकलने के सीमित रास्तों ने हादसे को और गंभीर बना दिया। मजदूरों के मुताबिक, इमारत में एक अन्य दरवाजा भी था, जो बाहर से दिखाई देता था, लेकिन उसे अधिकतर समय बंद रखा जाता था। बेसमेंट में आग लगने के बाद मजदूर जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों की ओर भागे। एक मजदूर नीचे उतरने की कोशिश में सीढ़ियों पर ही अचेत हो गया, जबकि बाकी मजदूर तीसरी मंजिल के एक कमरे में बेहोशी की हालत में मिले। इमारत में जालियां तो लगाई गई थीं, लेकिन धुआं बाहर निकलने के लिए कोई खुला स्थान नहीं था। सीढ़ियों पर भी जूते बनाने में इस्तेमाल होने वाली कतरन और फैक्टरी का सामान रखा हुआ था, जिससे आपात स्थिति में बाहर निकलना और मुश्किल हो गया। हैरानी की बात यह है कि फैक्टरी मालिक के पास अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) भी नहीं था।
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कहीं मशीनों से बनते थे जूते तो कहीं होती थी पैकिंग, तीसरी मंजिल पर था गोदाम : फैक्टरी की चार मंजिलों और बेसमेंट में अलग-अलग काम होते थे। बेसमेंट में क्लिकर मशीन लगाई गई थी, जबकि भूतल पर डीआईपी मशीन और पहली मंजिल पर वर्टिकल मशीन से जूते बनाने का काम किया जाता था। दूसरी मंजिल पर जूतों की पैकिंग होती थी और तीसरी मंजिल का इस्तेमाल गोदाम के रूप में किया जाता था। इस तरह इमारत की अलग-अलग मंजिलों पर जूतों के उत्पादन से लेकर पैकिंग और तैयार माल के भंडारण तक का काम चल रहा था।
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पहले भी धधकी थीं फैक्ट्रियां : मंगोलपुरी का यह हादसा दिल्ली की फैक्टरियों में अग्नि सुरक्षा के इंतजामों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है। करीब एक सप्ताह पहले मायापुरी में खिलौने और सजावटी सामान बनाने वाली फैक्टरियों में आग लगी थी। इससे पहले गांधी नगर और समयपुर बादली की फैक्टरियों में भी आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन हादसों में किसी की जान नहीं गई थी, लेकिन फैक्टरियों में आग से बचाव के इंतजामों को लेकर सवाल जरूर उठे थे। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। पिछले हादसों से सबक लेकर यदि फैक्टरियों में अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए होते और आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी के पर्याप्त रास्ते बनाए गए होते तो शायद मंगोलपुरी में चार मजदूरों को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती।
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