जयशंकर कई देशों के समकक्ष से मिले
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भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के अटलांटा में आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान कई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। इन बैठकों में यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया की स्थिति, व्यापार, रक्षा, परमाणु सहयोग और तकनीक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने यूरोपीय संघ, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, मैक्सिको, ब्राजील और जर्मनी के प्रतिनिधियों से मुलाकात की।
भारत-कनाडा सहयोग की प्रगति पर चर्चा
जयशंकर ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ भी बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ रहे सहयोग की समीक्षा की गई। जयशंकर ने मुलाकात के बाद कहा कि कनाडा की विदेश मंत्री से मिलकर उन्हें खुशी हुई। दोनों नेताओं ने भारत और कनाडा के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की प्रगति का जायजा लिया। इसके अलावा जयशंकर ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ भी मुलाकात की। इस बैठक में ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-भारत टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन (एसीआईटीआई) साझेदारी पर चर्चा हुई। इस पहल का उद्देश्य तीनों देशों के बीच तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाना है।
अर्जेंटीना के साथ व्यापार और रक्षा सहयोग पर बातचीत
विदेश मंत्री ने अर्जेंटीना के विदेश मंत्री पाब्लो क्विरनो के साथ भी बैठक की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों, रक्षा और परमाणु सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को लेकर भी विचार साझा किए गए। जयशंकर ने मैक्सिको के विदेश मंत्री रॉबर्टो वेलास्को अल्वारेज से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने पर जोर दिया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत और मैक्सिको के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत करना था।
ब्राजील और जर्मनी के विदेश मंत्रियों से भी मिले
जयशंकर ने ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा के साथ भी बैठक की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-ब्राजील संबंधों के साथ-साथ वैश्विक मुद्दों पर बातचीत की। वहीं, जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ भी उनकी मुलाकात हुई। जयशंकर ने इस बैठक को लेकर खुशी जताई और कहा कि उन्हें जर्मनी के विदेश मंत्री के साथ बातचीत का हमेशा इंतजार रहता है। जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई इन मुलाकातों के जरिए भारत ने कई प्रमुख देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों, आर्थिक सहयोग और वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।