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सीहोर: महोड़िया में बिजली संकट पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, राजस्व मंत्री का काफिला रोककर सुनाई खरी-खरी

Sat, 31 Oct 2026 06:09 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

गांव में बिजली गुल हो, खेतों में सिंचाई ठप हो और बच्चों की पढ़ाई अंधेरे में हो तो आखिर ग्रामीण कब तक चुप बैठें? सीहोर जिले के महोड़िया गांव में बिजली व्यवस्था की बदहाली को लेकर ऐसा ही आक्रोश देखने को मिला। कई दिनों से बिजली संकट झेल रहे ग्रामीणों का सब्र उस समय टूट गया, जब गांव में आयोजित जनविश्वास कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे राजस्व मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक करण सिंह वर्मा का काफिला ग्रामीणों ने बीच रास्ते में रोक लिया। ग्रामीणों ने मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों को घेरकर अपनी समस्याएं सामने रखीं।

उनका कहना था कि बिजली विभाग की लापरवाही के कारण पूरा गांव परेशान है लेकिन शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा। हालात यह हैं कि ग्रामीणों को अपनी जेब से पैसे जुटाकर ट्रांसफार्मर लगवाना पड़ा, वह भी कुछ घंटे चलने के बाद बंद हो गया।

गांव में अंधेरा और खेतों में सिंचाई ठप
ग्रामीण लाल सिंह, बारे लाल सहित अनेक ग्रामीणों का आरोप है कि महोड़िया गांव में पिछले कई दिनों से बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित है। बिजली की अनियमितता ने ग्रामीणों की दिनचर्या को अस्त-व्यस्त कर दिया है। घरों में रोशनी की समस्या है तो बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों को रोजमर्रा के काम निपटाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बाद भी बिजली व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। विभागीय स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होने से लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही थी।

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मोटर पंप बंद होने से फसलों पर संकट
बिजली संकट का सबसे गंभीर असर किसानों पर पड़ रहा है। खेतों में फसल खड़ी है और सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत है लेकिन आपूर्ति बाधित होने से मोटर पंप बंद पड़े हैं। किसानों के सामने फसलों को समय पर पानी देने का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि खेती पहले ही कई चुनौतियों से जूझ रही है, ऐसे में बिजली विभाग की लापरवाही उनकी मुश्किलें और बढ़ा रही है। यदि समय पर बिजली नहीं मिली तो इसका असर फसलों की पैदावार और किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।

खुद खरीदा ट्रांसफार्मर
गांव में बिजली व्यवस्था की स्थिति कितनी खराब है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ग्रामीणों को खुद पैसे जुटाकर ट्रांसफार्मर लगवाने की नौबत आ गई। ग्रामीण राम सिंह, लाल सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने आपसी सहयोग से प्रत्येक घर से 500 रुपये एकत्रित किए और किसी तरह ट्रांसफार्मर की व्यवस्था करवाई। उम्मीद थी कि अब गांव की बिजली समस्या खत्म हो जाएगी लेकिन उनकी उम्मीद ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सकी और नया ट्रांसफार्मर महज कुछ घंटे चलने के बाद बंद हो गया। अब सवाल यह है कि ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद उसकी जांच और सुधार की जिम्मेदारी किसकी है?

गांव में आयोजित जनविश्वास कार्यक्रम के दौरान जब राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा और जिले के वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे तो ग्रामीणों ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर दी और मंत्री का काफिला बीच रास्ते में रोक दिया। ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि बिजली की समस्या का समाधान किए बिना वे अपनी शिकायतों को अनसुना नहीं होने देंगे। अचानक सामने आए इस विरोध के बाद मंत्री और अधिकारियों को ग्रामीणों के बीच रुककर उनकी समस्याएं सुननी पड़ीं। ग्रामीणों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बताया कि किस तरह उन्हें खुद पैसे खर्च कर ट्रांसफार्मर लगवाने के बावजूद अंधेरे में रहना पड़ रहा है।

नया ट्रांसफार्मर लगाने का आश्वासन
ग्रामीणों की नाराजगी और शिकायतों को सुनने के बाद राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा और प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया। साथ ही बिजली विभाग की लापरवाही की जांच कराने और गांव में नया तथा सुचारू ट्रांसफार्मर स्थापित कराने का भरोसा दिलाया गया। इसके बाद ग्रामीणों का आक्रोश शांत हुआ।

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