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Vande Mataram Bill: वंदे मातरम बिल पर छिड़ी सरकार- विपक्ष में जुबानी जंग विरोधी दलों ने जताई आपत्ति!

वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Updated Sat, 18 Jul 2026 04:30 AM IST

संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले ही राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। केंद्र सरकार की ओर से एक प्रस्तावित विधेयक लाने की चर्चा है, जिसमें राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का अपमान करने या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस प्रस्तावित बिल को मानसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा में पेश कर सकते हैं। हालांकि, विधेयक संसद में पेश होने से पहले ही इस पर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी शुरू हो गई है।

प्रस्तावित बिल को लेकर विपक्षी दलों और कुछ नेताओं ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर किसी पर जबरदस्ती नहीं की जानी चाहिए। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी पार्टी और समुदाय वंदे मातरम का सम्मान करते हैं, लेकिन इसके कुछ अंशों को लेकर धार्मिक आधार पर आपत्ति है। उन्होंने कहा कि कुछ पंक्तियां ऐसी हैं जिन्हें कुछ मुसलमान अपने धार्मिक विश्वासों के कारण नहीं गा सकते। वारिस पठान ने कहा कि किसी व्यक्ति पर इसे अनिवार्य रूप से थोपना उचित नहीं होगा और ऐसा माहौल नहीं बनना चाहिए जिसमें गीत नहीं गाने वाले लोगों को देश विरोधी या गद्दार समझा जाए।

दूसरी ओर, भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है और इसका सम्मान सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के बाद कांग्रेस की सरकारों ने वोट बैंक की राजनीति के कारण वंदे मातरम को अपेक्षित महत्व नहीं दिया। गौरव वल्लभ ने कहा कि देश में रहने वाले हर व्यक्ति को राष्ट्रीय प्रतीकों और उनकी भावना का सम्मान करना चाहिए।

इस मुद्दे पर भाजपा और विपक्ष के बीच विचारों का स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। जहां सरकार समर्थक नेता इसे राष्ट्रीय सम्मान और देशभक्ति से जुड़ा विषय बता रहे हैं, वहीं विरोधी दल इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देख रहे हैं।

‘वंदे मातरम’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एक महत्वपूर्ण प्रेरणास्रोत रहा है और इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त है। अब प्रस्तावित विधेयक को लेकर संसद के अंदर और बाहर बहस तेज होने की संभावना है। मानसून सत्र में इस बिल पर चर्चा के दौरान राजनीतिक दल अपने-अपने तर्क रखेंगे और इसके बाद ही इसकी आगे की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

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