कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार को नई दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ राज्य में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार सहित विभिन्न राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर महत्वपूर्ण बैठकें कीं। दोनों नेताओं ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की, जिसके बाद उन्होंने कर्नाटक के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला के साथ भी विस्तृत चर्चा की। बैठक के बाद सुरजेवाला ने पत्रकारों को बताया कि यह प्रारंभिक चरण की चर्चा थी और कर्नाटक मंत्रिमंडल का विस्तार जल्द किए जाने की संभावना है। उन्होंने संकेत दिया कि यह विस्तार 6 अगस्त से शुरू होने वाले कर्नाटक विधानसभा के मानसून सत्र से पहले किया जा सकता है। इस बैठक में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद भी उपस्थित रहे। सुरजेवाला ने कहा कि बैठक केवल मंत्रिमंडल विस्तार तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें राज्य सरकार और पार्टी संगठन से जुड़े कई अहम विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस पूरे देश में 'छात्रों की गूंज' अभियान चला रही है और इसी अभियान के तहत बेंगलुरु में भी एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है, हालांकि इसकी तारीख अभी तय नहीं की गई है। इसके अलावा 'संगठन सृजन अभियान' को भी अब कर्नाटक में शुरू किया जाएगा, जिसके लिए पार्टी ने पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी है। इस अभियान का उद्देश्य बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन को मजबूत करना और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। सुरजेवाला ने यह भी कहा कि बैठक में केंद्र और राज्य के संबंधों पर विस्तार से चर्चा हुई। उनके अनुसार, कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र की भाजपा सरकार कर्नाटक के साथ वित्तीय और प्रशासनिक मामलों में व्यवस्थित भेदभाव कर रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य को उसके अधिकारों के अनुरूप संसाधन और सहायता नहीं मिल रही है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कांग्रेस नेतृत्व ने इस मुद्दे को जनता के बीच प्रमुखता से उठाने और इसके खिलाफ राजनीतिक अभियान चलाने की रणनीति पर भी विचार किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि संगठन को मजबूत करने, सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों की तैयारी के लिए लगातार इस तरह की बैठकों का आयोजन किया जाएगा। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार के साथ-साथ संगठनात्मक बदलावों को भी अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।