जरीफनगर। दहगवां क्षेत्र के गांव नसीरपुर टप्पा मलसई में बुखार और पेट के दर्द से तीन दिन में दो सगे भाइयों की मौत हो गई, जबकि तीसरा भाई बुखार की चपेट में है। परिजनों के मुताबिक, दोनों भाई संभल जिले में ईंट-भट्टे पर काम किया करते थे। भाइयों की मौत से गांव में संक्रमण फैलने की आशंका से ग्रामीणों में दहशत है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार को गांव पहुंचकर ग्रामीणों की जांच की।
नसीरपुर टप्पा मलसई निवासी होरीलाल के चार बेटे हैं। 26 वर्षीय बड़े बेटे नेत्रपाल की शादी हो गई है। वह गांव में ही खेती-किसानी करता है। उनके दो अन्य पुत्र मोरपाल (20) और ब्रजेश (18) जनपद संभल के खादराबाद में ईंट-भट्टे पर मजदूरी किया करते थे। वहीं सबसे छोटा बेटा सोनू (16) गांव में पिता के साथ खेती में हाथ बंटाता है।
करीब एक सप्ताह पहले मोरपाल और ब्रजेश गांव आए थे। उसके बाद उन्हें पेट में दर्द और बुखार की शिकायत हुई। दोनों ने पास के गांव शेखूपुरा में झोलाछाप से अपना इलाज कराया। दर्द-बुखार कम न होने और हालत बिगड़ने पर वह बरेली चले गए। वहां एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में दिखाया। वहां से दोनों को दिल्ली रेफर कर दिया गया। वहां इलाज के दौरान ब्रजेश की 15 जुलाई और मोर सिंह की 17 जुलाई को मौत हो गई। वहीं सोनू का इलाज घर पर चल रहा है। वह हेपेटाइटिस बी से पीड़ित है। वहीं उसकी बहन सर्वेश और बहनोई नेम सिंह भी हेपेटाइटिस बी से पीड़ित बताए जा रहे हैं। उनका इलाज भी सीएचसी के चिकित्सक कर रहे हैं।
दो भाइयों की बुखार से मौत होने की जानकारी हुई है। इसमें ब्रजेश के इलाज से जुड़े कागजात परिजन से मिल गए हैं, इसमें एक को हेपेटाइटिस बी था, लेकिन मौत की वजह स्पष्ट तभी होगी जब पूरी रिपोर्ट आ जाएगी। मोरपाल के इलाज से जुड़े अभी कागजात नहीं मिले हैं। गांव में एहतियातन कैंप लगवाकर ग्रामीणों की जांच कराई है। इसमें छह हेपेटाइटिस बी के मरीज सामने आए हैं। कैंप अभी जारी रहेगा। - डॉ. विकास शर्मा, सीएमओ
मृतक मोरपाल