कायस्थ पाठशाला के अध्यक्ष डॉ. सुनील सिन्हा ने शनिवार को दावा किया कि रविवार को उनके विरुद्ध लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव पर तीन सौ से अधिक न्यासियों के हस्ताक्षर फर्जी हैं। कई न्यासियों ने सहायक रजिस्ट्रार सोसाइटी के समक्ष इस आशय का शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया है। वह चाहते हैं कि प्रत्येक कायस्थ परिवार का एक-एक सदस्य केपी ट्रस्ट से जुड़ जाए। इसके लिए 100 रुपये की सदस्यता शुल्क करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन पुराने मठाधीश इसे पचा नहीं पा रहे हैं। इसी वजह से उन्हें हटाने के लिए कूचरचना की जा रही है।
सिविल लाइंस स्थित प्रेस रिपोर्टर क्लब में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि कायस्थ पाठशाला को अपनी जागीर समझने वाले पुराने मठाधीश 27 अक्तूबर को गवर्निंग काउंसिल की बैठक में सौ रुपये के सदस्यता शुल्क वाले प्रस्ताव को पास नहीं होने देना चाहते हैं। विपक्षियों का अविश्वास प्रस्ताव इसी मुद्दे के विरोध को दर्शाता है।
अध्यक्ष डॉ. सुशील सिन्हा ने आरोप लगाया कि 19 सितंबर को कुमार नारायण और उनके सहयोगियों ने जो अविश्वास प्रस्ताव स्पीड पोस्ट के जरिए भेजा था,वह असांविधानिक है। कुमार नारायण कायस्थ पाठशाला के प्राथमिक सदस्य भी नहीं हैं। उन्होंने जब जनवरी में अध्यक्ष पद का पदभार ग्रहण किया तो उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं थी। जुलाई में अनुभव श्रीवास्तव ने अपने शिकायती पत्र में इसको लेकर आरोप लगाया था, लेकिन उन्होंने उस पत्र पर कोई संज्ञान नहीं लिया। लेकिन, कुमार नारायण के कायस्थ पाठशाला के विरुद्ध किए जा रहे कार्याें को देखते हुए उन्होंने दो सदस्यों की एक समिति बनाई। इस समिति की रिपोर्ट से पता चला कि उनकी सदस्यता निलंबित है और वर्तमान में कायस्थ पाठशाला के सदस्य भी नहीं हैं।
अध्यक्ष सुशील सिन्हा ने दावा किया कि 720 लोगों की अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में सूची दी गई है, इनमें 307 के हस्ताक्षर फर्जी है। इस जालसाजी में वरिष्ठ अधिवक्ता टीपी सिंह, राघवेंद्र सिंह और कौशलेंद्र सिंह भी शामिल हैं। इससे पहले अमित श्रीवास्तव को उपाध्यक्ष पद पर नामित किया गया। इस मौके पर वीर कृष्ण श्रीवास्तव, निशीथ वर्मा समेत कई पदाधिकारी उपस्थित थे।