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सियासत: राजीव बिंदल बोले- बीबीएमबी पर हिमाचल की जीत की नींव धूमल सरकार के संघर्ष से पड़ी

Sat, 07 Nov 2026 12:28 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, नाहन (सिरमौर)।

सार

 प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने बीबीएमबी की जलविद्युत परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश के बिजली बकाये को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 6 नवंबर 2026 के फैसले को प्रदेश के अधिकारों की ऐतिहासिक जीत बताया है।
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. राजीव बिंदल। - फोटो : अमर उजाला
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने बीबीएमबी की जलविद्युत परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश के बिजली बकाये को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 6 नवंबर 2026 के फैसले को प्रदेश के अधिकारों की ऐतिहासिक जीत बताया है। उन्होंने कहा कि इस जीत की नींव पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के संघर्ष से पड़ी थी, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के प्रयासों से इस विवाद का निर्णायक समाधान निकला है। बिंदल ने कहा कि 27 सितंबर 2011 को धूमल सरकार के कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के 7.19 प्रतिशत हिस्से के कानूनी अधिकार को मान्यता दी थी।

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इसके बाद भी बकाये का अंतिम निपटारा नहीं हो पाया। केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तुत कैशलेस सेटलमेंट फॉर्मूले के तहत नकद भुगतान के बजाय बिजली के रूप में बकाया देने की व्यवस्था की गई, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि गणना के अनुसार हिमाचल का कुल बिजली बकाया 13,066 मिलियन यूनिट निर्धारित हुआ। प्रदेश की 420.77 करोड़ रुपये की पूंजीगत देनदारी समायोजित करने के बाद हिमाचल को करीब 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी। आदेश के अनुसार पंजाब और हरियाणा अगले 20 वर्षों तक अक्तूबर से मार्च के दौरान प्रतिवर्ष करीब 598 मिलियन यूनिट बिजली उपलब्ध करवाएंगे।
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बिंदल ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से इस फैसले का राजनीतिक श्रेय लेने के बजाय जनता को पूरे मामले का इतिहास बताने की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्र सरकार का आभार जताया। उन्होंने किशाऊ बांध परियोजना के लिए 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार की ओर से वहन करने की स्वीकृति को भी महत्वपूर्ण बताया। साथ ही आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुक्खू ने किशाऊ बांध से जुड़े सिरमौर के किसानों के पानी के अधिकारों की अनदेखी की है और उनके हिस्से का पानी दिल्ली व राजस्थान को देने का फैसला किया है।
 
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