एप डाउनलोड करें
विज्ञापन

Shimla News: जिले में हर विकास खंड में बनेंगे कृषि आधारित मॉडल गांव

विज्ञापन
विज्ञापन
सात हजार किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का है लक्ष्य, डीसी ने की आत्मा परियोजना की समीक्षा
विज्ञापन

18 नए क्लस्टर बनाए जाएंगे, 4.27 करोड़ रुपये होंगे खर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला शिमला में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हर खंड में मॉडल गांव स्थापित किए जाएंगे। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने शुक्रवार को नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (आत्मा परियोजना) की वार्षिक योजना समीक्षा बैठक की। इसी बैठक में यह निर्णय लिया गया।
उपायुक्त ने कहा कि इन गांवों में कृषि, उद्यान, मत्स्य पालन और पशुपालन विभागों की योजनाओं का संयुक्त लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास विभाग इन कार्यों को पंचायती राज प्रणाली से जोड़ेगा। अनुपम कश्यप ने कहा कि मॉडल गांव प्राकृतिक खेती के प्रमुख केंद्र बनेंगे। यहां किसान प्रशिक्षण प्राप्त करने के साथ नवीन कृषि तकनीकों का आदान-प्रदान कर सकेंगे। यह पहल आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक होगी। केंद्र सरकार के नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत इन आदर्श ग्रामों को विकसित किया जाएगा। इनका उद्देश्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके तहत केवल टुटू खंड में दो मॉडल गांव बनाए जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


उपायुक्त ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिला शिमला में 7,000 किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 50 चिह्नित क्लस्टरों में लगभग 2,500 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल किया है। अब 18 नए क्लस्टर बनाए जाएंगे जिससे कुल क्लस्टरों की संख्या 68 हो जाएगी, इन पर 4 करोड़ 27 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। जिले में 33 बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर और 136 से अधिक कृषि सखियां तैनात की गई हैं। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को प्रति एकड़ प्रति वर्ष 4,000 रुपये की सहायता दो वर्षों तक दी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिला शिमला के 6,720 किसानों को इस प्रोत्साहन राशि से लाभान्वित किया गया है। कृषि सखियों को 15 कार्य दिवसों के लिए प्रति माह 5 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा। जिले के 12 बाल देखभाल केंद्रों में भी प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा। बच्चों को जीवामृत बनाने और कृषि के प्रति रुचि विकसित करने के गुर सिखाए जाएंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें