कटनी की सुरंग का निरीक्षण करने पहुंचे सीएम मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
सुरंग को 100 साल बाद भी कुछ नहीं होगा, भूकंप भी बेअसर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि परियोजना के शुरुआती वर्षों में निर्माण कार्य की रफ्तार काफी धीमी थी। वर्ष 2015 तक केवल 1406 मीटर खुदाई हो सकी थी। इसके बाद वर्ष 2016 में जर्मनी से लाई गई अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) की मदद से निर्माण कार्य में तेजी आई। कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों, विशाल चट्टानों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के बीच इंजीनियरों, तकनीशियनों और श्रमिकों ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा किया है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह सुरंग करीब 100 वर्षों तक सुरक्षित रहेगी और भीषण भूकंप का भी इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। कई स्थानों पर इसकी गहराई जमीन से 120 फीट तक है।
परियोजना बनेगी मिसाल
सीएम ने कहा कि भविष्य में इंजीनियरिंग संस्थानों में इस परियोजना का अध्ययन केस स्टडी के रूप में किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस शासनकाल में प्रदेश का सिंचित रकबा केवल 7.5 लाख हेक्टेयर था। उन्होंने कहा कि नदियां भी यहीं थीं, जंगल भी यहीं थे और तकनीक भी उपलब्ध थी, लेकिन काम करने की इच्छाशक्ति नहीं थी। इसी वजह से किसानों को वर्षों तक पर्याप्त सिंचाई सुविधाएं नहीं मिल सकीं और सरकारें उन्हें उनकी समस्याओं के बीच छोड़ती रहीं। लेकिन भाजपा सरकार आते ही हमने सिंचाई क्षमता बढ़ाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में सिंचित रकबा बढ़कर 44 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा। वहीं, वर्तमान सरकार के ढाई वर्षों में यह आंकड़ा बढ़कर 65 लाख हेक्टेयर के पार हो गया है। उन्होंने कहा कि स्लीमनाबाद जल सुरंग जैसी परियोजनाएं इसी सोच का परिणाम हैं, जो किसानों की आय बढ़ाने के साथ प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देंगी।
ये भी पढ़ें-
इंदौर में नवलखा चौराहे पर फूटी पाइपलाइन, सड़कों पर नदी के समान बहता रहा नर्मदा जल