हमेशा हंसती खिलखिलाती नजर आने वाली कॉमेडियन भारती सिंह बात करते-करते अचानक रोने लगी। मां ने इसकी वजह बताई है, जानिए।
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भारती सिंह
दरअसल, दुनिया की बेहतरीन नाटशालाओं में शुमार पंजाब नाटशाला ने भारती सिंह को ‘प्राइड ऑफ पंजाब नाटशाला’ अवार्ड से सम्मानित किया। भारती सिंह ने ही इसकी शुरुआत की और उन्हें ही सबसे पहला अवार्ड दिया गया। इसलिए वह भावुक थी और बात करते-करते भावनाओं पर काबू नहीं रख पाई। खुद भारती सिंह ने कहा कि इतना प्यार और अपनापन देखकर वह रो पड़ीं।
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भारती ने कहा कि वह भारती सिंह और कॉमेडियन बाद में हैं, नाटशाला की बेटी पहले। नाटशाला के संस्थापक जतिंदर बराड़ तथा पद्मश्री शायर सुरजीत पातर के हाथों मिले इस सम्मान को सिर मत्थे लगाया। कहा कि नाटशाला उनकी मां है और बराड़ सर उनके पिता, जिनके जरिये वह इस मुकाम पर पहुंची हैं। उन्होंने कहा कि वह कहीं भी रहेंगी नाटशाला उनकी सांसों में बसी रहेगी।
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भारती सिंह
बता दें कि पंजाब नाटशाला के 20 साल के सफर के पूरे होने पर 27 मार्च को वर्ल्ड थिएटर डे सम्मान समारोह का आयोजन किया गय। इस दौरान नाटशाला की तरफ से ‘पंजाब नाटशाला गौरव’ अवार्ड शुरू किया गया। सबसे पहले भारती सिंह को यह सम्मान दिया गया। आठ दिन तक नाटशाला में चले थिएटर फेस्टिवल के आखिरी दिन पद्मश्री शायर सुरजीत पातर बतौर मुख्य मेहमान शामिल हुए।
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समारोह शुरू होने से पहले दोनों लोगों ने नाटशाला में नए बने ऑडिटोरियम का उद्घाटन किया। इसमें इमैनुअल लिखित नाटक चुगलीखाना पेश किया गया। बता दें कि जितेंद्र बराड़ पंजाब नाटशाला के संस्थापक हैं। उन्होंने ही मंगलवार को प्राइड ऑफ पंजाब नाटशाला अवॉर्ड की शुरुआत की। जिसका पहला अवॉर्ड भारती सिंह को दिया गया। कॉमेडियन भारती सिंह ने पंजाब नाटशाला से ही करियर की शुरुआत की थी।
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समारोह की शुरुआत नाटशाला के 20 वर्षों की उपलब्धियों की डाक्यूमेंट्री दिखाकर की गई, इसके बाद भारती सिंह के काम की डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई। इस मौके पर 15 से अधिक उन संस्थाओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने नाटशाला के इस सफर में योगदान दिया। इसके तहत 150 कलाकारों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने नाटशाला के मंच पर अधिक शो किए। भारती सिंह के लिए यह सम्मान भावुकता भरा रहा।
सुरजीत पातर ने भी इस भावुकता भरे पल में अपने विचार सांझे किए और कहा कि नाटशाला की स्थापना सिर्फ कला और कलाकारों को प्रफुल्लित करना ही नहीं है बल्कि समाज, देश और काल में चेतना लाना, सामाजिक बुराइयों के प्रति लोगों को तैयार करना है। उन्होंने कहा कि भारती को सम्मान देकर नाटशाला खुद गौरवान्वित महसूस कर रही है और भविष्य में बेहतर काम करने वालों को यह सम्मान दिया जाता रहेगा।