धमकाकर डराकर पैसा देने के लिए विवश किया
इस दौरान एक बार भी बबलू को नैनी जेल से बाहर नहीं लाया गया लेकिन आरोपी नैनी जेल में बंद रहने के दौरान अनेक सिम की सहायता से मोबाइल फोन का प्रयोग किया। कहा गया कि आरोपी ने जेल के बाहर कृष्णा शेट्टी और अपने अन्य साथियों से संपर्क करके लोगों से रंगदारी मांगी।
बताया गया कि बबलू के साथी जेलकर्मियों को रिश्वत देते थे, जिसके चलते वह जेल से मोबाइल का प्रयोग करता था। बबलू श्रीवास्तव के सहयोगी फर्जी नाम-पते पर सिम कार्ड खरीदकर बबलू को जेल में पहुंचाते थे। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि इन्हीं सिम कार्ड से बबलू श्रीवास्तव नैनी जेल में बंद रहते हुए क्रिकेट सट्टा संचालक, सट्टेबाज से संपर्क किया और उन्हें धमकाकर डराकर पैसा देने के लिए विवश किया।
बताया गया कि बबलू के गिरोह ने हुबली, कच्छ, इंदौर, अहमदाबाद और दरभंगा जैसे जगहों पर अपहरण, हत्या और रंगदारी जैसे अपराध किए हैं। आगे कहा गया कि वादी धीरेंद्र श्रीवास्तव के सिम में एसटीडी सुविधा पाने के लिए उसके फर्जी हस्ताक्षर करके एस्सार कंपनी को पत्र लिखा गया था।
बबलू ने इस सिम का प्रयोग करके मुंबई के पीर हैंड, दिलीप जैन, निमेंद्र कुमार चोकसी और विनोद जी असरानी को धमकी देकर रंगदारी वसूली थी। यही नहीं, आरोपी ने क्रिकेट मैच में सट्टा खेलने और क्रिकेट मैचों का विवरण नैनी जेल में बबलू को उपलब्ध कराने के लिए मजबूर किया। सीबीआई ने विवेचना के बाद आरोपी बबली श्रीवास्तव के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। कोर्ट ने इसका संज्ञान लेकर बबलू श्रीवास्तव पर 30 अक्तूबर 2003 को जान का भय दिखाकर रंगदारी मांगने और धमकी देने के आरोपों में आरोप तय किए थे।
अपहरण के मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली
माफिया डॉन ओम प्रकाश उर्फ बबलू श्रीवास्तव को करीब 20 साल पुराने अपहरण के मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। 6 नवंबर को लखनऊ की सीबीआई कोर्ट ने बबलू श्रीवास्तव को इस मामले में बरी कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव के खिलाफ मुकदमे में भले ही हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है लेकिन उनका जेल से बाहर आना फिलहाल मुमकिन नहीं है। बबलू पहले से सजायाफ्ता है। 6 नवंबर 2024 में राज्यपाल द्वारा उसकी दया याचिका को खारिज किया जा चुका है।
बता दें कि 24 मार्च 1993 में बबलू श्रीवास्तव ने प्रयागराज में अपने गुर्गों के साथ कस्टम कलक्टर एलडी अरोड़ा की हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड के बाद बबलू पर टाडा लगाया गया था जिसके बाद 30 सितंबर 2008 को कानपुर नगर स्थित कोर्ट ने बबलू को उम्र कैद की सजा सुनाई थी।
वहीं 25 जनवरी 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सजा को यथावत रखा था। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दया याचिका पर राज्य सरकार ने विचार करने को कहा था। राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया था कि बबलू श्रीवास्तव की दया याचिका को खारिज किया जा चुका है।
उसके साथी मंगेश व कमल किशोर सैनी की दया याचिका भी खारिज कर दी गई थी। बता दें कि वर्तमान में बबलू बरेली सेंट्रल जेल में बंद है। इससे पहले प्रयागराज के पंकज महिंद्रा अपहरण कांड से भी बबलू बरी हुआ था लेकिन उसकी जेल से रिहाई नहीं हो पाई थी।