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DU PG Admission: डीयू ने क्यों बनाई छह सदस्यीय समिति? एक वर्षीय PG पाठ्यक्रमों में सीटें बढ़ाने पर चल रहा मंथन

Fri, 17 Jul 2026 07:39 PM IST
Akash Kumar पीटीआई, नई दिल्ली

सार

DU PG Admission: दिल्ली विश्वविद्यालय में एक वर्षीय पीजी कोर्सों में सीटें बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। बढ़ते आवेदन और सीमित सीटों को देखते हुए विश्वविद्यालय ने इस मुद्दे पर विचार करने के लिए छह सदस्यीय समिति बनाई है, जो जल्द अपनी सिफारिशें देगी।
 
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दिल्ली विश्वविद्यालय, (DU) - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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DU PG Admission: दिल्ली विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अपने एक वर्षीय स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों में सीटें बढ़ाने की मांग पर विचार शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालय ने इस संबंध में एक 6 सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो सीट बढ़ाने के अनुरोधों की समीक्षा करेगी और इसके लिए जरूरी सुझाव देगी।

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विश्वविद्यालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, विभिन्न विभागों से एक वर्षीय पीजी कार्यक्रमों में सीटें बढ़ाने के लिए कई अनुरोध प्राप्त हुए थे। इन्हीं प्रस्तावों पर विचार करने के लिए यह समिति बनाई गई है। समिति को अपनी सिफारिशें 10 दिनों के भीतर सौंपने को कहा गया है।

कौन-कौन हैं समिति में शामिल?

इस समिति की अध्यक्षता डीन (अकादमिक मामलों) करेंगे। इसके अलावा इसमें डीन (एडमिशन), डीन (सोशल वर्क), रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष, संयुक्त कुलसचिव (कानूनी) और उप कुलसचिव (भर्ती एवं पदोन्नति) को सदस्य बनाया गया है।

क्यों उठी सीटें बढ़ाने की मांग?

दिल्ली विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम पूरा करने वाले छात्रों के लिए पहली बार एक वर्षीय पीजी कार्यक्रम शुरू किए हैं। लेकिन इन पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या सीमित होने के कारण बड़ी संख्या में छात्र प्रवेश को लेकर चिंतित हैं। विश्वविद्यालय के अनुसार, अब तक 12,639 उम्मीदवारों ने इन एक वर्षीय पीजी कार्यक्रमों में दाखिले के लिए पंजीकरण कराया है।
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एबीवीपी ने किया प्रदर्शन

सीटें बढ़ाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय के आर्ट्स फैकल्टी के बाहर प्रदर्शन भी किया। संगठन ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम से बड़ी संख्या में छात्र निकल रहे हैं, जबकि एक वर्षीय पीजी कोर्स में सीटें उनकी तुलना में काफी कम हैं।

एबीवीपी के दिल्ली प्रदेश सचिव सार्थक शर्मा ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय देशभर के लाखों छात्रों की पहली पसंद है, लेकिन सीमित सीटों के कारण कई योग्य छात्रों को प्रवेश से वंचित होना पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय जल्द फैसला नहीं लेता है तो संगठन अपना आंदोलन और तेज करेगा।
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