सरकार के साथ कर मुद्दों को लेकर कानूनी मुकदमों में उलझे करीब पांच लाख उद्यमों में से 20 फीसदी ने सरकार की विवाद निपटान योजना को चुना है। इससे करीब 83 हजार करोड़ रुपये की विवादित राशि से जुड़े मामलों को सुलझाने में मदद मिली है। वित्त सचिव अजय भूषण पांडेय ने कहा कि, 'लंबित मामलों में से 96 हजार ने लंबित कानूनी मामले के निपटान की योजना का चयन किया। इन मामलों में करीब 83 हजार करोड़ रुपये का राजस्व अटका पड़ा है।' वहीं अब तक एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की कर मांग का निपटान कर लिया गया है।
2020-21 के बजट में की थी घोषणा
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश करते हुए प्रत्यक्ष कर से जुड़े पुराने कानूनी मामलों को सुलझाने के लिए 'विवाद से विश्वास' योजना की घोषणा की थी। योजना के जरिए विभिन्न अपीलीय मंचों में लंबित करीब 4.8 लाख अपीलों के चलते अटके 9.32 लाख करोड़ रुपये के कर-राजस्व को मुक्त करने का प्रयास था।
31 जनवरी है समय सीमा
इस योजना के तहत मिल रहे आवेदनों और दिसंबर में आवेदनों में तेजी को देखते हुए सरकार ने इसकी समय सीमा एक महीने बढ़ाकर 31 जनवरी कर दी थी। इस योजना को अपनाने वाली कंपनियों अथवा फर्मों को उनसे मांगे गए कर का भुगतान करना है और उनके खिलाफ जारी विव़ाद को बंद कर दिया जायेगा और दंडात्मक कार्रवाई को भी छोड़ दिया जाएगा।'
एक लाख करोड़ से ज्यादा कर मांग का निपटान किया गया
उन्होंने कहा कि, 'योजना के तहत एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की कर मांग का निपटान किया गया। यह कर मांग गलत जानकारी दर्ज होने के कारण पैदा हुई थी।' विवाद से विश्वास योजना का लाभ उठाने वाली कंपनियां जेसे ही बकाया कर का भुगतान करती है, उनके खिलाफ लंबित मामले को वापस लिया मान लिया जाता है और ब्याज, जुर्माना और दंड को भी निरस्त कर दिया जाता है। ये मामले आयकर आयुक्त (अपील) और कर न्यायाधिकरणों से लेकर उच्च अदालतों और मध्यस्थता केंद्रों तक में लंबित हैं।