विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
यह प्रतिक्रिया भूटान के एक समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट के बाद सामने आई।
रिपोर्ट में कहा गया था कि-
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भूटान ने इथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल के बजाय सामान्य पेट्रोल की आपूर्ति जारी रखने का अनुरोध किया।
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रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि E20 पेट्रोल को लेकर कुछ उपभोक्ताओं ने इंजन खराब होने और माइलेज कम होने जैसी चिंताएं जताई हैं।
हालांकि, भारत सरकार पहले भी ऐसे दावों को खारिज कर चुकी है।
भूटान के पत्रकार ने रिपोर्ट पर क्या कहा?
भूटान के पत्रकार और अखबार 'द भूटानीज' (The Bhutanese) के संपादक तेनजिंग लमसांग ने सोशल मीडिया एक्स (X) पर कई पोस्ट कर अपनी रिपोर्ट का बचाव किया।
उन्होंने-
भूटान के दस्तावेज में कौन-कौन सी चिंताएं बताई गईं?
तेनजिंग लमसांग द्वारा साझा किए गए कथित दस्तावेज में E20 पेट्रोल को लेकर कुछ आशंकाओं का उल्लेख किया गया।
दस्तावेज के अनुसार-
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यदि इथेनॉल मिश्रित ईंधन में पानी मिल जाए, तो पानी और ईंधन को आसानी से अलग नहीं किया जा सकता।
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इससे ईंधन की गुणवत्ता और वाहन के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है।
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भूटान के मौजूदा भूमिगत ईंधन भंडारण टैंकों में E20 संग्रहित करने पर ईंधन की गुणवत्ता बनाए रखना और दूषित होने से बचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
भूटान ने भारत की तेल कंपनियों से क्या अनुरोध किया?
कथित दस्तावेज में यह भी कहा गया कि-
E20 पेट्रोल डिस्पेंसर (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : AI
E20 कार्यक्रम को लेकर विवाद क्यों बढ़ा?
रिपोर्ट के अनुसार, इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को इसकी घोषणा के बाद से ही आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है।
इस कार्यक्रम में-
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अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों को शामिल किया गया है।
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इनमें E100 भी शामिल है, जिसमें लगभग 93 प्रतिशत शुद्ध इथेनॉल होता है।
पिछले कुछ महीनों में आलोचना और बढ़ी क्योंकि-
इंजन खराब होने के दावों पर सरकार का क्या कहना है?
भारत सरकार ने दोहराया कि-
गन्ने के रस को पेट्रोल में मिलाने वाले वायरल दावों पर क्या प्रतिक्रिया दी गई?
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि-
सरकार ने इन दावों को-
E20 कार्यक्रम को लेकर सरकार ने क्या कहा?
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार-
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इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम वैज्ञानिक परीक्षणों पर आधारित है।
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इसकी लगातार निगरानी की जाती है।
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अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों को लागू करने से पहले व्यापक तकनीकी मूल्यांकन किया गया।
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इस प्रक्रिया में वाहन निर्माता कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों और वैज्ञानिकों से विस्तृत परामर्श भी किया गया।
यह पूरा प्रकरण स्पष्ट करता है कि जहां एक ओर सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की रणनीति के रूप में देख रही है। वहीं उपभोक्ता स्तर पर जानकारी और तकनीकी स्पष्टता को लेकर अभी भी काफी बहस जारी है।