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Pithoragarh News: बर्न वार्ड में सिर्फ बिस्तर, इलाज की बेहतर सुविधा नहीं
Mon, 02 Nov 2026 11:35 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Mon, 02 Nov 2026 11:35 PM IST
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पिथौरागढ़। दिवाली नजदीक है। पटाखों और अन्य आगजनी की घटनाओं में घायलों का इलाज करने के लिए जिले के तीन अस्पतालों में बर्न वार्ड तैयार किए गए हैं। हैरानी है कि इन वार्डों में बिस्तर तो लगा दिए गए हैं लेकिन आगजनी की घटनाओं में घायलों के बेहतर इलाज के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। ऐसे में हर दिवाली पर स्थापित होने वाले बर्न वार्ड में घायलों को सिर्फ प्राथमिक इलाज ही नसीब होता है। गंभीर घायलों को हायर सेंटर रेफर करना ही एकमात्र विकल्प है।
जिले में आठ नवंबर को दिवाली पर्व मनाया जाएगा। दिवाली पर हर साल आतिशबाजी के दौरान बच्चे से लेकर युवा और बुजुर्ग झुलसते हैं। इस बार भी जिला अस्पताल, सीएचसी धारचूला और डीडीहाट में इन घटनाओं में घायलों के इलाज के लिए बर्न वार्ड बना दिए गए हैं। इन वार्ड में सिर्फ 15 बिस्तर लगाकर औपचारिकता निभाई गई है। किसी भी आगजनी की घटना में जलने वालों के बेहतर इलाज के लिए प्लास्टिक सर्जन की तैनाती के साथ ही फ्लुइड रिससिटेशन और मॉनिटरिंग सिस्टम, स्किन ग्राफ्टिंग और सर्जिकल वार्ड आदि सुविधाएं जरूरी हैं। हैरानी है कि किसी भी अस्पताल में यह सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। सिर्फ प्राथमिक इलाज ही बर्न वार्ड में मिलता है। गंभीर हालत में घायलों को हायर सेंटर भेजना ही एकमात्र विकल्प है।
बीते वर्ष पटाखों से झुलसने के लिए आए थे 25 मामले
पिथौरागढ़। बीते वर्ष जिले में पटाखों से झुलसने के लिए 25 मामले सामने आए थे। 20 मामलों में मामूली रूप से झुलसे घायलों को स्थानीय स्तर पर इलाज मिल सका। गंभीर रूप से झुलसे पांच घायलों को हायर सेंटर रेफर किया गया। परिजनों को घायलों के बेहतर इलाज के लिए उन्हें मैदानी क्षेत्रों में ले जाना पड़ा।
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- जिले में तीन अस्पतालों में बर्न वार्ड की सुविधा है। आगजनी की घटनाओं में घायलों को स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
डॉ.जेएस चुफाल, सीएमओ, पिथौरागढ़
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जिले में आठ नवंबर को दिवाली पर्व मनाया जाएगा। दिवाली पर हर साल आतिशबाजी के दौरान बच्चे से लेकर युवा और बुजुर्ग झुलसते हैं। इस बार भी जिला अस्पताल, सीएचसी धारचूला और डीडीहाट में इन घटनाओं में घायलों के इलाज के लिए बर्न वार्ड बना दिए गए हैं। इन वार्ड में सिर्फ 15 बिस्तर लगाकर औपचारिकता निभाई गई है। किसी भी आगजनी की घटना में जलने वालों के बेहतर इलाज के लिए प्लास्टिक सर्जन की तैनाती के साथ ही फ्लुइड रिससिटेशन और मॉनिटरिंग सिस्टम, स्किन ग्राफ्टिंग और सर्जिकल वार्ड आदि सुविधाएं जरूरी हैं। हैरानी है कि किसी भी अस्पताल में यह सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। सिर्फ प्राथमिक इलाज ही बर्न वार्ड में मिलता है। गंभीर हालत में घायलों को हायर सेंटर भेजना ही एकमात्र विकल्प है।
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बीते वर्ष पटाखों से झुलसने के लिए आए थे 25 मामले
पिथौरागढ़। बीते वर्ष जिले में पटाखों से झुलसने के लिए 25 मामले सामने आए थे। 20 मामलों में मामूली रूप से झुलसे घायलों को स्थानीय स्तर पर इलाज मिल सका। गंभीर रूप से झुलसे पांच घायलों को हायर सेंटर रेफर किया गया। परिजनों को घायलों के बेहतर इलाज के लिए उन्हें मैदानी क्षेत्रों में ले जाना पड़ा।
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- जिले में तीन अस्पतालों में बर्न वार्ड की सुविधा है। आगजनी की घटनाओं में घायलों को स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
डॉ.जेएस चुफाल, सीएमओ, पिथौरागढ़