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पिंडरा पर अजय राय का दावा: पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने गौतम-मोना पर साधी चुप्पी, खुद को बताया राहुल का सिपाही

Tue, 03 Nov 2026 05:15 AM IST
Rajkishor राजकिशोर
Updated Tue, 03 Nov 2026 05:15 AM IST
सार

पिंडरा सीट के लिए अजय राय ने कहा कि पिंडरा को मैंने कभी विधानसभा नहीं माना, अपना परिवार माना है। 1993 से लगातार काम कर रहा हूं।

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Ajay Rai stakes claim to Pindra Former Congress president remains silent on Gautam and Mona describes himself
अजय राय, नेता, कांग्रेस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बनारस में योगी सरकार के मंत्री और भाजपा के सारे विधायक जिसके खिलाफ आक्रोश सभा करते रहे, जिसने तीन लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी के सामने ताल ठोकी, उस सेनापति को 2027 की लड़ाई से कुछ महीने पहले उसकी अपनी पार्टी ने हटा दिया।

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अपनी बेलौस जुबान के लिए पहचाने जाने वाले उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय राय ने इस पर शिकायत का एक शब्द नहीं कहा। प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और नई प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना पर हर सवाल से वह कटते रहे। हर बार एक ही जवाब पर लौटे कि ‘राहुल गांधी का सिपाही हूं, आखिरी सांस तक साथ खड़ा रहूंगा।’ पर एक बात पर उन्होंने कोई कूटनीति नहीं बरती कि ‘निश्चित तौर से पिंडरा से चुनाव लड़ूंगा।’ सपा से सीट बंटवारा होने से पहले किया गया यह एलान अखिलेश यादव के लिए भी साफ संदेश है। अमर उजाला के पॉडकास्ट अनम्यूट भारत की यह बातचीत रामलीला मैदान में राहुल गांधी की वोट चोरी रैली से ठीक पहले रिकॉर्ड हुई थी। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष उस दिन रैली की तैयारी बैठक करके गाजियाबाद से आए थे। हटाए जाने के कुछ दिन बाद ही वह राहुल की रैली के लिए भीड़ जुटा रहे थे। राय की आगे की राजनीति इसी तस्वीर में दिखती है: हटाने वालों पर चुप्पी, अपनी सीट पर दावा और वफादारी सीधे राहुल के नाम।
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अंदर कहां कमी रह गई, इस सवाल पर राय का जवाब दोधारी था की ‘हो सकता है जिनको अवसर मिला है, वो ज्यादा काम कर पाएंगे, ज्यादा कार्यकर्ताओं का दिल जीत पाएंगे।’ सुनने में यह शुभकामना थी, पर इसमें यह सवाल भी छिपा था कि चुनाव से ठीक पहले बदलाव की जरूरत क्या थी। पूछा गया कि जिसे सत्ता पक्ष खतरा मानता है, उसे गौतम और पार्टी क्यों नहीं समझ पाए।

राय ने गौतम का नाम तक नहीं लिया और सीधे राहुल पर आ गए। राय बोले कि ‘अकेला आदमी है जो छाती खोलकर लड़ रहा है। ये मेरा वचन है, उनको वचन दे चुका हूं।’ गौतम के मन में क्या था, इस पर बोले कि ‘वो मैं नहीं बता सकता। मेरे किसी से संबंध खराब नहीं हैं।’
 
प्रयागराज में दोनों के सामने कार्यकर्ताओं की भिड़ंत पर पूछा गया कि कहीं गौतम मोदी का एजेंडा तो लागू नहीं कर रहे। राय ने यह सवाल छुआ तक नहीं, बस नए नेतृत्व को शुभकामनाएं दे दीं। प्रदेश कार्यालय में मोना की मौजूदगी में हुए हंगामे को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण कहकर "राष्ट्र प्रथम" पर बात खत्म कर दी।
 
चुप्पी के मायने : पार्टी ने अगस्त 2023 से प्रदेश की कमान संभाल रहे भूमिहार नेता राय की जगह ब्राह्मण चेहरा आराधना मिश्रा मोना को चुना है। प्रभारी के पद पर दलित नेता गौतम पहले ही आ चुके थे। प्रकाशित खबरों में इस बदलाव को कांग्रेस के पुराने ब्राह्मण-दलित-मुस्लिम समीकरण की वापसी से जोड़ा गया। राय और गौतम के बीच महीनों से चल रहे मतभेद भी चर्चा में रहे। ऐसे में राय की बगावत खबर बन सकती थी, पर उनकी चुप्पी ने खबर की दिशा बदल दी।


पिंडरा पर दावा, अखिलेश को संदेश
पिंडरा पर राय के तेवर गौतम वाले सवालों से बिल्कुल अलग थे। वहां कोई नपा-तुला जवाब नहीं था, सिर्फ भावनात्मक दावा था। बक़ौल राय, ‘पिंडरा को मैंने कभी विधानसभा नहीं माना, अपना परिवार माना है। 1993 से लगातार काम कर रहा हूं। निर्दलीय भी जीते, उपचुनाव भी जीते। घर से घाट तक खड़ा रहूंगा।’उन्होंने बताया कि उनका बेटा भी वहां सक्रिय है, यानी तैयारी अगली पीढ़ी तक है। पूछा गया कि क्या सपा यह सीट कांग्रेस को देगी। राय ने अखिलेश का नाम लिए बिना आंकड़ों की भाषा में जवाब दिया।

उनका दावा है कि पिछले चुनाव में हार के बावजूद पिंडरा में उनका वोट सपा और अपना दल (कमेरावादी) के गठबंधन से काफी आगे था। इसका सीधा मतलब है कि पिंडरा पर सपा का दावा कमजोर है और यह सीट कांग्रेस की है। कुल सीटों के सवाल पर भी राय ने संख्या नहीं बताई, बस शर्त रख दी कि कार्यकर्ताओं का सम्मान होना चाहिए। यह वही बात है जो वह अध्यक्ष रहते कहते आए थे कि गठबंधन बराबरी से होगा, पिछलग्गू बनकर नहीं। अखिलेश के प्रति राय का लहजा जितना नरम था, दावा उतना ही सख्त। 

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