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राजस्थान: गुलाबगंज से माउंट आबू तक बनेगा 22 किमी का नया रास्ता, सिरोही से दूरी 55 किमी रह जाएगी

Sat, 31 Oct 2026 05:51 PM IST
सिरोही ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही

सार

गुलाबगंज से माउंट आबू तक 22 किलोमीटर लंबी नई सड़क परियोजना के अलाइनमेंट को मंजूरी मिल गई है। करीब 225 करोड़ रुपये की इस योजना से सिरोही की दूरी 100 से घटकर 55 किलोमीटर होगी। अब वन विभाग की एनओसी का इंतजार है।

 

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सांकेतिक - फोटो : AI
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विस्तार
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प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू पहुंचने के लिए अब तक आबूरोड के प्रमुख सड़क मार्ग पर निर्भर रहने वाले लोगों और पर्यटकों को जल्द ही वैकल्पिक रास्ता मिलने की उम्मीद है। गुलाबगंज से माउंट आबू तक 22 किलोमीटर लंबी नई सड़क बनाने की योजना ने अहम पड़ाव पार कर लिया है। करीब 225 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए प्रस्तावित तीन अलाइनमेंट में से पहले से बनी ग्रेवल सड़क वाले मार्ग को राज्यस्तरीय तकनीकी कमेटी ने उपयुक्त मानते हुए मंजूरी दे दी है। अब वन विभाग की एनओसी का इंतजार है। सड़क बनने के बाद सिरोही से माउंट आबू की दूरी करीब 100 किलोमीटर से घटकर 55 किलोमीटर रह जाएगी।

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तीन प्रस्तावित अलाइनमेंट में से एक को मंजूरी
परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए पहले चरण में भौगोलिक सर्वे कराया गया। इसके बाद कंसल्टेंसी फर्म ने तीन संभावित अलाइनमेंट तैयार कर सार्वजनिक निर्माण विभाग को सौंपे। राज्यस्तरीय तकनीकी कमेटी ने परीक्षण के बाद पहले से मौजूद ग्रेवल सड़क वाले अलाइनमेंट को उपयुक्त माना।

अब जयपुर की कंसल्टेंसी फर्म को स्वीकृत अलाइनमेंट के लिए वन विभाग जयपुर में निर्धारित प्रारूप के अनुसार आवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। नई सड़क बनने से पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और व्यापारियों को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। माउंट आबू स्थित वायुसेना स्टेशन के लिए भी आवागमन सुगम होने की उम्मीद है। करीब पांच दशक से प्रतीक्षित इस सड़क परियोजना के निर्माण से पहले वन एवं पर्यावरण संबंधी स्वीकृतियां हासिल करना सबसे बड़ी चुनौती है।

वन विभाग की एनओसी होगी अगली बड़ी चुनौती
प्रस्तावित सड़क वन्य अभयारण्य क्षेत्र से गुजरने के कारण वन विभाग की अनुमति महत्वपूर्ण है। राज्य वन विभाग से एनओसी मिलने के बाद प्रस्ताव वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार को भेजा जाएगा। इसके बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), नई दिल्ली के समक्ष आवश्यक अनुमति की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यानी अलाइनमेंट मंजूर होने के बाद भी सड़क निर्माण से पहले पर्यावरण एवं वन संबंधी स्वीकृतियां हासिल करनी होंगी।

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सांसद के प्रयास, केंद्र से मिले 225 करोड़ रुपये
जिला विकास परिषद के सचिव महावीर जैन के अनुसार, इस सड़क की मांग पिछले करीब 50 वर्षों से उठाई जा रही है। क्षेत्रीय सांसद लुंबाराम चौधरी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ केंद्र सरकार के समक्ष इस वैकल्पिक मार्ग की आवश्यकता रखी। इसके बाद केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने केंद्रीय सड़क निधि से 225 करोड़ रुपये आवंटित किए। परियोजना की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी हो चुकी है। डीपीआर तैयार करने के लिए करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

दूरी ही नहीं, आबू की कनेक्टिविटी भी बदलेगी
नई सड़क दिल्ली-कांडला फोरलेन से सीधे जुड़कर माउंट आबू को राष्ट्रीय राजमार्ग-162 से बेहतर संपर्क उपलब्ध कराएगी। वर्तमान आबूरोड-माउंट आबू मार्ग पर भारी यातायात रहता है। पहाड़ी चट्टानों और गहरी खाइयों के कारण इसका चौड़ीकरण भी आसान नहीं है। बरसात में चट्टानें गिरने और भूस्खलन से रास्ता बंद होने पर पर्यटन नगरी का संपर्क प्रभावित होता है। ऐसे में नया मार्ग माउंट आबू के लिए वैकल्पिक संपर्क उपलब्ध कराने के साथ ही पर्यटकों और स्थानीय लोगों की आवाजाही को भी आसान बना सकता है। अब निगाहें वन विभाग की एनओसी और अन्य जरूरी स्वीकृतियों पर टिकी हैं। इनके मिलने के बाद ही पांच दशक से प्रतीक्षित सड़क परियोजना निर्माण के चरण तक पहुंच सकेगी।

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