गुलाबगंज से माउंट आबू तक 22 किलोमीटर लंबी नई सड़क परियोजना के अलाइनमेंट को मंजूरी मिल गई है। करीब 225 करोड़ रुपये की इस योजना से सिरोही की दूरी 100 से घटकर 55 किलोमीटर होगी। अब वन विभाग की एनओसी का इंतजार है।
प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू पहुंचने के लिए अब तक आबूरोड के प्रमुख सड़क मार्ग पर निर्भर रहने वाले लोगों और पर्यटकों को जल्द ही वैकल्पिक रास्ता मिलने की उम्मीद है। गुलाबगंज से माउंट आबू तक 22 किलोमीटर लंबी नई सड़क बनाने की योजना ने अहम पड़ाव पार कर लिया है। करीब 225 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए प्रस्तावित तीन अलाइनमेंट में से पहले से बनी ग्रेवल सड़क वाले मार्ग को राज्यस्तरीय तकनीकी कमेटी ने उपयुक्त मानते हुए मंजूरी दे दी है। अब वन विभाग की एनओसी का इंतजार है। सड़क बनने के बाद सिरोही से माउंट आबू की दूरी करीब 100 किलोमीटर से घटकर 55 किलोमीटर रह जाएगी।
अब जयपुर की कंसल्टेंसी फर्म को स्वीकृत अलाइनमेंट के लिए वन विभाग जयपुर में निर्धारित प्रारूप के अनुसार आवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। नई सड़क बनने से पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और व्यापारियों को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। माउंट आबू स्थित वायुसेना स्टेशन के लिए भी आवागमन सुगम होने की उम्मीद है। करीब पांच दशक से प्रतीक्षित इस सड़क परियोजना के निर्माण से पहले वन एवं पर्यावरण संबंधी स्वीकृतियां हासिल करना सबसे बड़ी चुनौती है।
वन विभाग की एनओसी होगी अगली बड़ी चुनौती
प्रस्तावित सड़क वन्य अभयारण्य क्षेत्र से गुजरने के कारण वन विभाग की अनुमति महत्वपूर्ण है। राज्य वन विभाग से एनओसी मिलने के बाद प्रस्ताव वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार को भेजा जाएगा। इसके बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), नई दिल्ली के समक्ष आवश्यक अनुमति की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यानी अलाइनमेंट मंजूर होने के बाद भी सड़क निर्माण से पहले पर्यावरण एवं वन संबंधी स्वीकृतियां हासिल करनी होंगी।